Avinash Pathak 9070



8 बजे के करीब ये भाषण लिख रहा था मुझे तब याद आया LLb first year के समय NCC का रविवार का प्रोग्राम था तब UHO tour Bharat के लिए मैने cycle ली थी रूम से university आया 6-7 km थी सुबह से 11 बज चुके थे भूख लग रही थी तब Pathak Temple का अभ्यास करता था बाहर का खाता नही था मेरे दोस्त आकाश ने खाना को बोला, जब मे बैठा उसने मुझसे कहा ' भाई तुम पंडित हो " मैने बोला हा बोला फिर तुम मत खाओ मे बाल्मीकि हूँ, मैने बोला तो बोला 'मेहतर' मुझे बुरा लगा क्योकि मैने कभी भी किसी दोस्त से जाति नही पूछी उसके मन मे ये सब किसने भरा? मैने कहा ये वता aunty ने बनाया क्या है, बोला पराठे मैने कहा बचाने के लिए बातें दे रहा खाने दे बात बदल के उस भेदभाव को वही मारा.... आगे चलकर उसने LLB ही की और अब जूनियर है पर तभी सोच लिया था भेदभाव मुक्त भारत अविनाशवाद ही करेगा .. . .... 


10.58-खाने के अलावा हर फल, भोजन का इतिहास भी बड़ा प्यारा है  , जैसे आम की हजार प्रजाति है उतनी ही केला की..... अंगूर की 15 प्रजाति है.....इतना कुछ है जानने को खाने को लोग जाने क्यों फसे है......फालतू लड़ाई झगड़े मे *सवाल असली तो ये है*.......इन फलो को हम खा रहे पर हमारी आने बाली पीढ़िया खा पायेगी क्या?   बनो के जीव जो हमने देखें है क्या वो भी देख पाएंगे क्या?   इसीलिए UHO का जन्म हुआ प्रकृति का भक्षण करते है रक्षण कौन करेगा? .... वृक्ष, पशु पक्षी फिर मानव क्रमशः कार्य करेगा UHO 

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